Short Moral Story In Hindi- “गुरु कृपा ही केवलम”

If you are looking for a Short Moral Stories in Hindi then a big collection is available here. Today’s in this post, we are sharing a Short Moral Story in Hindi. The name of the Moral Story is “Guru Kripa Hee Kewlam“. It’s a very Interesting Story and It’s written in Hindi. Must read! We hope you will be like and satisfied with us.

Short Moral Story in Hindi- "गुरु कृपा ही केवलम"

मित्रों! यह एक ऐसा Website है, जहां हम रोज एक ऐसे ही Short Moral Stories Hindi में Share करते हैं। जो व्यक्ति को एक नैतिक सीख देती है और जीने की कला सिखाती है।

दोस्तों! इस वेबसाइट में प्रेषित सभी Moral Stories पाश्चात्य काल के किसी न किसी दैनिक जीवन में घटित घटना से संबंधित है या फिर लोगों द्वारा कथित तौर पर कही गई है। जो आज निश्चित तौर पर हमारे दैनिक जीवन में घटित होती है।

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SHORT MORAL STORY

गुरु कृपा ही केवलम

शंकराचार्य के पास गिरि नामक एक ब्राह्मण बालक उसकी सेवा में था। निरक्षर होते हुए भी गिरी अत्यंत सेवाभावी मृदुभाषी एवं विनीत था। वह पूर्ण मनोयोग से सेवा करता था यद्यपि कि वह आचार्य के उद्देश्यों को समझ नहीं पाता था, फिर भी ध्यान पूर्वक सुनता था।

Short Moral Story in Hindi

एक दिन प्रवचन के समय आचार्य रुक कर इधर उधर देखने लगे उन्होंने पूछा: आज गिरी दिखाई नहीं पड़ रहा है। इस पर कुछ शिष्यों ने कहा कि नदी के किनारे कपड़ा साफ कर रहा होगा।

तो कुछ शिष्यों ने व्यंग्य से कहा कि गुरुदेव आप उपदेश दीजिए, गिरी तो अनपढ़ हैं वह तो समझ भी नहीं पाएगा फिर उसका इंतजार क्यों कर रहे हैं।

Interesting Short Moral Story in Hindi

आचार्य ने कहा कि उसे आने दो भले ही वह कुछ ना समझे पर बड़ी लगन के साथ उपदेश  सुनता है। गिरि की गुरुभक्ति एवं उसकी सेवा से आचार्य प्रसन्न थे।

उस पर आचार्य की ऐसी कृपा थी कि उसी क्षण वह गुरु के वस्त्रों को साफ करने के बाद त्रोटक छंद में गुरु महात्म्य परक एक स्रोत की रचना करते हुए कथा गुनगुनाते हुए गिरी आचार्य के समीप उपस्थित हुआ तथा उसी स्रोत का पाठ किया।

 अनपढ़ गिरि की इस प्रतिभा को देखकर सभी शिष्य आश्चर्यचकित रह गए। गुरु कृपा से अपने ज्ञानेन्द्रियों की शक्ति से, लगन तथा अथक प्रयासों से उसने सब कुछ प्राप्त कर लिया।

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आगे चलकर यही गिरी तोटकाचार्य के नाम से विख्यात हुआ जो शंकराचार्य के चार प्रमुख शिष्य में एक था। तथा ज्योतिर्मठ का आचार्य बना।

Moral Value:

दोस्तों यदि लगन से किस कार्य को किया जाये तो उसका हमें उचित समय पर परिणाम जरूर मिलता है। साथ ही कभी भी व्यक्ति को अपने होशियारी, ताकत और वस्तु पर घमंड नहीं होना चाहिए। क्योकि यह सिर्फ क्षण विशेष तक ही सांथ रहती है।

एक अहम बात कहना चाहूँगा दोस्तों! “जीवन में कभी भी सीखना बंद मत करना।”

हो सकता हैं आज आपके अच्छे दिन हो या बुरे दिन हो लेकिन “The beautiful thing about learning is that nobody can take it away from you.” आपने जो सिखा हैं उसे आपसे कोई नही छीन सकता।

हो सकता हैं Business में या Life में आपके साथ धोखे हो जिसके कारण आप वहां से निकाल दिए जाओ लेकिन आपने जो सिखा हैं उससे लगन के दम पर उससे भी बड़ा Business खड़ा कर सकते हैं।

“अपने आप को सीखने से रोकना मतलब जीवन को जीना बंद करना हैं” जीते जी मर जाना।

धन्यवाद!

मित्रो! आज की हमारी स्टोरी “गुरु कृपा ही केवलम” कैसे लगी और आपने क्या सिखा हमें  comment में जरूर बताये! यदि आपके पास भी ऐसी ही Interesting Short Moral Stories हैं तो आप हमें Comment या Gmail में जरुर भेजे उसे आपके फोटो और नाम से साथ हमारे Website के द्वारा लोगो तक पहुचाएंगे।

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