New Short Moral Stories in Hindi- “अपनी ताकत और योग्यता पर कभी घमंड न करे”

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नैतिक शिक्षा हमारे जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं|शिक्षा ही हमें अपने गुणों से परिचित करता हैं|तथा समाज में हमारे आदर्श को ऊँचा उठता हैं| हर एक Moral Stories हमें एक नई सिख देती हैं|ताकि उन तथ्यों को जानकर हम उसे अपने जीवन में उपयोग करे|और आने वाली ऐसे ही किसी विपरीत परिस्थितियों का सामना कर सके|

New Short Moral Stories in Hindi

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So Friends! Today’s our

INTERESTING MORAL STORY

“अपनी ताकत और योग्यता पर कभी घमंड न करे”

सूरज और हवा की प्रेरणादायक हिंदी कहानी

एक बार सूरज और हवा के बीच लड़ाई हो गई। दोनों एक दुसरे से विवाद करने लगे कि कौन सबसे अधिक शक्तिशाली हैं। हवा बड़ी ही घमंडी और जिद्दी स्वाभाव की थी। उसे अपनी शक्ति पर बड़ा ही अभिमान था।

उसका मानना था कि अगर मैं तेज गति से बहने लागु तो बड़े-बड़े पेड़ों को उखाड़ सकती हूँ , फसलो को नस्ट कर सकती हूँ। उसमें उपस्थित आर्द्रता नदियों और झीलों के पानी को भी जमा सकती हूँ।

हवा अपने इसी घमंड के चलते सूरज से कहते हैं कि मैं तुमसे ज्यादा शक्तिशाली हूँ। मेरी शक्ति के सामने किसी का ज़ोर नहीं चलता। मैं दुनिया में सबसे ज्यादा शक्तिशाली हूँ मेरे सामने सब तुच्छ हैं।

तब सूरज ने बड़े ही शांत तरीके से हवा से कहा कि हर किसी में शक्तियाँ भी होती हैं और कमजोरियाँ भी इसलिए हमें ख़ुद की ताकत और योग्यता पर घमंड नहीं करना चाहिए। हमें सबका सम्मान करना चाहिए और सबके साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए।

हवा यह सुनकर चिढ़ गई और खुद को ज्यादा शक्तिशाली बताती रही। इस प्रकार वे दोनों एक दूसरे से बहुत समय तक बहस करते ही रहे। तभी अचानक उन्होनें देखा कि सामने से एक व्यक्ति कंबल ओढ़े पैदल आ रहे हैं।

उसे देखकर हवा को अपनी शक्ति का प्रर्दशन करने की एक योजना सूझी। और उसने सूरज से कहा- देखो, वह एक व्यक्ति आ रहा है, हम दोनों में से जो भी उसकी कंबल को उसके शरीर से उतारने के लिए मजबूर कर देगा, उसे ही अधिक शक्तिशाली माना जाएगा।

सूरज ने हवा की बात मानकर कहा – ठीक हैं।

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फिर हवा ने कहा सबसे पहले मैं प्रयत्न करूंगी। तब तक तुम बादलों में छिप जाओ। सूरज बादलों के पीछे छिप गया।

फिर हवा चलने लगी। कुछ समय बाद वह अपने प्रचंड रूप में आ गई धरती पर धूल भरी आंधी चलने लगी, पेड़-पौधे लहराने लगे, सूखे पत्ते व अन्य सामान उड़ने लगे, मौसम ठंडा होने लगा पैदल जा रहे व्यक्ति की कंबल भी हवा के कारण उड़ने लगी लेकिन उसने उसे पकड़ लिया और अपने शरीर से कसकर लपेट लिया।

हवा ने अपनी प्रचंडता और अधिक बढ़ाई, लेकिन उसके साथ ठंड भी बढ़ गई व्यक्ति ने अपनी कंबल और कसकर लपेट ली बहुत प्रयासों के बाद भी हवा उसके शरीर से कंबल हटा नहीं पाई। अंत में हवा थककर शांत हो गई।

इसके बाद सूरज की बारी आई।

वह बादलों से बाहर निकला और हल्की धूप करके चमकने लगा।थोड़े ही देर में सूर्य ने अपना ताप बढ़ाना शुरू किया। तापमान बढ़ते ही धरती पर जा रहे व्यक्ति को गर्मी लगने लगे। वह पसीना-पसीना हो गया और कंबल को उतार दिया।

जब हवा ने यह देखा, तो वह खुद पर शर्मिंदा होने लगी और उसने सूरज के सामने अपनी हार मान ली। इस तरह घमंडी हवा का अंहकार भी टूट गया।

Moral:-

  • अपनी योग्यता व ताकत पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि घमंड करने वालों की कभी जीत नहीं होती है।
  • घमंडी का सिर हमेशा नीचा होता है।

धन्यवाद!

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