Inspirational Short Stories in Hindi- “ संगति का बुरा असर ”

Hello Friends! Are you searching for Inspirational Short Stories in Hindi? Now you are in the perfect place. Here we published everyday Interesting Moral Stories in Hindi. Now our today’s Moral Story is “ संगति का बुरा असर ”.

मित्रों ! हम एक समाज में रहते हैं और हमारे आस पास बहुत से लोग होते हैं, तथा हम अपना जीवन अकेले व्यतीत नहीं कर सकते इसलिए हमें लोगों के साथ रहना पड़ता है,और संगति चुननी पड़ती है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम कैसी संगति चुनते हैं, अगर आप अच्छी संगति चुनते हैं तो आप जीवन में आगे बढ़ेंगे बुरे कामों में नहीं पड़ेंगे। यदि आप अगर बुरी संगती चुन लेते हैं तो आपका जीवन खराब हो जायेगा। संगत कैसी भी हो उसका असर हमेशा हमारे ऊपर पड़ता जरूर है, इसलिए हमेशा अच्छी संगत में रहना चाहिए।

अच्छी सोच वाले व्यक्ति हमेशा आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे और बुरी सोच वाले व्यक्ति आपको पीछे खींच लेंगे आपको बुरे कामों में डालेंगे इसीलिए ऐसे व्यक्तियों के आसपास रहिए जिनका व्यवहार अच्छा हो, ऐसे लोगों की संगति आपके लिए अच्छी साबित होगी। आइये हम आपको इस संगति के असर पर आधारित एक छोटी सी कहानी बताते हैं ।

Inspirational Short Stories in Hindi

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So Friends! Today’s our

INTERESTING MORAL STORY

“ संगति का बुरा असर ”

एक गाँव में शिव नाम का व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहता था।

उसका एक बेटा था राजू। राजू के घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं था। राजू के माता-पिता उससे बहुत प्यार भी करते थे। उन्होंने उसके परवरिश में कोई कमी नहीं की। उसे जो भी चाहिए होता था , उसके मांगने से पहले ही उसे मिल जाता था।

राजू की जिंदगी बड़े ही आराम से और मजे से कट रही थी। ना ही उसे किसी चीज की कोई भी चिंता थी पर फिर भी वह व्यवहार से काफी अच्छा था और इसीलिए उसे सब पसंद भी करते थे।

जैसे-जैसे राजू बड़ा होता गया वह धीरे धीरे बुरे लोगों की संगती में आ गया।

राजू अब बुरी आदतों वाले दोस्तों के साथ रहता था और उन्ही लोगों के साथ स्कूल जाता ,खेलता और इधर-उधर धूमता था। जिसके कारण वह भी बुरी आदतों से घिर गया था। उसके अंदर भी तमाम ऐसी बुरी आदतों का विकास हो गया था।

राजू अब अपने माता-पिता के कहना को भी नहीं मानता था और उनकी बताई गई बातो पर भी बिल्कुल ध्यान नहीं देता था। वह किसी का नहीं सुनता था केवल अपनी ही मनमानी करता था। जिससे उसके माता-पिता बहुत चिंतित रहने लगे थे।

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एक दिन राजू के पिता शिव को अपने बेटे की बुरी संगती से छुटकारा दिलाने का एक उपाय सुझा।

राजू और उसके पिता जी हर समय की तरह इस बार भी दोनों सब्जी लेने के लिए बाजार गये।


राजू के पिता ने एक टोकरी नीबू खरीदा उस टोकरी के सभी नीबू बहुत ही अच्छा और ताजा था। केवल एक नीबू को छोड़कर जो सड़ा हुआ था। फिर वह दोनों घर आ गये।

घर वापस आने के बाद पिता ने राजू को अपने पास बुलाया और कहा बेटा दो थैला लाओ और दोनों थैलों में यह नीबू अधा-अधा डाल दो राजू ने अपने पिता की बात मानकर ऐसा ही किया और उसमे से एक थैले में उसके पिता सड़ी हुई नीबू डाल दी और दोनों थैलों को रखने को कहा। पिता की बात मानकर राजू ने नीबू की थैलों को रख दिया।

कुछ दिनों बाद राजू के पिता राजू को नीबू की थैलों को लाने बोलता हैं। राजू दोनों थैलों को लाने जाता हैं दोनों थैलों को देखते ही राजू आश्चर्यचकित हो जाता है। राजू अपने पिता जी के पास दोनों थैलों का नीबू लाता हैं और वह अपने पिता को बताते हैं कि-पिता जी

एक थैले का सारा नीबू खराब हो गया हैं। एक थैले बस का नीबू ठीक हैं।

राजू फिर अपने पिताजी से पूछता है पिता जी ऐसा क्यों हुआ ?

अपने बेटे की बात सुनकर पिता जी बोले !

देखा बेटा हमने उस दिन बाजार में अच्छे नीबू के साथ एक सड़ा हुआ नीबू भी ख़रीदा था और एक थैले के सारे नीबू के साथ उस सड़ी हुई एक नीबू को भी डाल दिए थे जिसके कारण साथ में रखे हुए बाकि के अच्छे नीबू भी खराब हो गए।

उसी तरह एक बुरी संगत और एक बुरा दोस्त आपका पूरा जीवन खराब कर सकता हैं।

यदि तुम बुरे दोस्तों की संगति में रहते हो तो तुम्हारी सोच और आदते भी वैसे ही हो जायेगी फिर चाहकर भी तुम अच्छे इन्सान नही बन सकते हो।

पिता की बात सुनकर अब राजू को समझ में आ गया। उसके बाद से वह बुरे लोगों का साथ छोड़कर सिर्फ अच्छे लोगों से ही दोस्ती करता है और धीरे-धीरे वह एक अच्छा इंसान बन जाता हैं।

Moral:

  • जैसी संगति में रहते हैं वैसा ही गुण आता है। अर्थात अच्छी संगति का संगत करना चाहिए।
  • आप भी अपनी संगति का चुनाव अच्छा ही करें , क्योंकि बुरे संगति का असर बुरा ही होता हैं।

दोस्तो, हर व्यक्ति पर संगत का असर पड़ ही जाता है जैसे वर्षा की बूँदें बिल्कुल स्वच्छ और पवित्र होती हैं मगर जैसे ही वो धरती पर आकर गिरती हैं, तो वह गंदी हो जाती हैं और मिट्टी में मिलकर वह कीचड़ बन जाती हैं। ठीक उसी प्रकार व्यक्ति भी अगर बुरी संगति में चला जाए तो, वो भी बुरा होने से नहीं बच सकता हैं।

धन्यवाद!

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