Short Story in Hindi-“बोले हुए शब्द वापस नहीं होते”

Today’s we are sharing the very Interesting Short Story in Hindi. The biggest weapon of a person is the tongue. It can make such a fight like that we cannot even think whether it is Ramayana or Mahabharata etc. The person is not hurt by the weapon or by the tongue of the person more than he is hurt. Today’s Our Short Story in Hindi is “बोले हुए शब्द वापस नहीं होते”. Here a lot of collection of short Moral stories in Hindi. We hope you will like, share and Subscribe to our website.

Short Story in Hindi-बोले हुए शब्द वापस नहीं होते

मित्रों! यह एक ऐसा Website है, जहां हम रोज Short Story Hindi में बच्चों के लिए Share करते हैं! जो व्यक्ति को एक नैतिक सीख देती है और जीने की कला सिखाती है|

दोस्तों इसमें प्रेषित सभी Moral Stories पाश्चात्य काल के किसी न किसी दैनिक जीवन में घटित घटना से संबंधित है! या फिर लोगों द्वारा कथित तौर पर कही गई है| जो आज निश्चित तौर पर हमारे दैनिक जीवन में घटित होती है!

So Friends! Today’s our

INTERESTING MORAL STORY

“बोले हुए शब्द वापस नहीं होते”

एक गाँव में दो सज्जन पुरुष निवास करते थे| दोनों ही व्यक्तियों का घर एक ही मोहल्ले में आमने सामने था| दोनों बहुत ही दयालु और लोगो की जैसे भी बन पड़े हर संभव मदद करते थे| दोनों एक दुसरे की बहुत सम्मान भी करते थे|

एक दिन किसी कारण वश प्रथम व्यक्ति ने अपने पड़ोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ| तो वह एक संत से मिला उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा| संत ने कहा: “तुम खूब सारे पंख इकट्ठे कर लो और उन्हें शहर के चौराहे पर बीचो-बीच जाकर रख दो”|

guru and shishy.Short Story in Hindi-बोले हुए शब्द वापस नहीं होते (1)

Must Read: Moral Stories in Hindi

व्यक्ति ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया, तब संत ने कहा अब जाओ और उन पंखों को इकट्ठे करके वापस ले आओ| व्यक्ति वापस गया तो जब तक सारे पंख उड़ गए थे, और वह खाली हाथ संत के पास पहुंचा|

 संत ने उससे कहा: “ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है, तुम आसानी से उन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते|

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जीवन में भी ऐसा ही हैं कुछ कड़वा, गलत बोलने से पहले यह याद रखें कि भला बुरा कहने के बाद कुछ भी करके अपने शब्द वापस नहीं लिया जा सकते| हाँ माफी जरूर मांग सकते हैं, और मांगनी भी चाहिए पर सामने वाला कहीं ना कहीं दुखी अवश्य होता हैं|

Moral:

  • एक बात अवश्य याद रखो “पहले तौलो फिर बोलो” सोचो की यही बात जो मैं बोलने वाला हूँ अगर कोई दूसरा मुझे बोले तो कैसा लगेगा| अगर आपको लगता यह शब्द उनके लिए सही हैं, तो अवश्य बोलो|
  • जब तीर कमान से निकल जाती हैं तो उसको रोकना असंभव हैं| जुबान का भी ऐसा ही हैं, पहले देख तो लो कौन सा शब्द निशाने पर लगा रहे हो| शब्दों का तीक्ष्ण प्रहार, भेदे गए तीर से भी ज्यादा घायल करता हैं|
  • जहाँ बोलने की आवश्यकता नही हैं वहां बिलकुल ना बोले अनुभव कहता हैं ” खामोशियाँ ही बेहतर हैं शब्द से, लोग रुठते बहुत हैं|”
  • गलतियों को भूलने का एक ही नियम हैं: ” माफ़ कर दो या माफी मांग लो|”

धन्यवाद!

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