Short Moral Stories- “जीवन का सत्य”

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Friends! This is www.thoughtsguruji.com. Today we are sharing a story based on the truth of life, which makes a person aware of the reality of real-life that all wealth is of no use, in the end, everything has to be left here, both hands of man would remain empty while dying. Yes, no matter how much property you have earned, you have to leave everything.

Short Moral Stories- जीवन का सत्य

मित्रों! यह एक ऐसा Website है, जहां हम रोज Short Moral Stories आपके लिए Share करते हैं! जो व्यक्ति को एक नैतिक सीख देती है और जीने की कला सिखाती है|

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So Friends! Today’s our

INTERESTING MORAL STORY

“जीवन का सत्य” 

सिकंदर महान कह रहा है कि: जीवन के अंत के बाद मेरी 3 इच्छाओ पर अमल किया जाये|

  • पहला

“मरने के बाद मेरे दोनों हाथ कफन से बाहर रखे जाएं”| वसीयत लिखने वाले को यह बात अजीब सी लगी, उसने कहा: “क्षमा करें, महान सम्राट! आपकी यह बात मेरी समझ में नहीं आई, आपकी इस इच्छा का कारण क्या है? आपके मन में यह इच्छा कैसे आई? इससे आप क्या सिद्ध करना चाहते हैं?”

Last wish of the sikandar.जीवन-का-सत्य

सिकंदर ने जवाब में कहा: “मेरा एक सपना था, कि मैं विश्व विजेता बनु और दुनिया की सारी दौलत मेरे कदमों पर हो, मैंने अपना सपना साकार कर लिया, किंतु अर्जित की हुई संपत्ति का एक कतरा भी, मैं अपने साथ नहीं ले जा सकूंगा| सब कुछ यही का यही रह जाएगा|

death ceremony of the sikandar the great.Moral Stories

Must Read: Short Moral Stories in Hindi

 मैं दुनिया को यही बताना चाहता हूं कि धरती की बेहिसाब संपदा का मालिक सिकंदर, जब इस दुनिया से गया तो उसके दोनों हाथ खाली थे| “इन्सान खाली हाथ आता हैं और खाली हाथ ही जाता ही जाता हैं|”

  • दूसरा

“जिन हकीमों ने मेरा अब तक इलाज किया वो सब जनाजे को कन्धा दे|” वसीयत लिखने वाला फिर पूछता हैं: ऐसी क्यों? आलमपनाह!

सिकंदर बोलता हैं: “ताकि सबको पता चले की हकीम भी मरने से रोक नही सकते और न ही उसकी औषधि काम आति हैं|”

funeral of sikandar the great.  Short-Moral-Stories
  • तीसरा

अंतिम यह: “जनाजे ही राह में वो सारी दौलत बिछा दी जाए, जो मैंने जिंदगी भर इकठ्ठा की हैं|”

क्यों जनाब?

सिकंदर: “इसलिए, ताकि सब जान ले कि जब मौत की घड़ी आती हैं, तब ये दौलत भी किसी काम नही आती|”

Truth of life. it's images of the Story. Short Moral Stories

Short Moral Stories- “The Truth of life”

यह बात सिकंदर जैसे सामर्थ्यवान कुछ लोग को ही समझ में आती है, अन्यथा आसक्ति (मन का लगाव) के कारण आदमी, आखरी दम तक धन संपदा से चिपका रहता है| आसक्ति से परे होने का रुप यह है कि काम लिया और छोड़ दिया|

किंतु कुछ लोगों को संग्रह का इतना शौक होता है, कि अपने घर को वे कबाड़खाना बना लेते हैं|वे  केवल लेना और पकड़ना जानते हैं, छोड़ना और देना नहीं| वहां फिर बहुत कुछ सारी समस्याएं और दुख पैदा होते हैं|धन की निरर्थकता  समझ में आ जाए तो यह आसक्ति छूट सकती है|

परन्तु यहां जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है आसक्ति उतनी ही अधिक बढ़ती जाती है|

यदि आसक्ति रखनी ही है तो सांसारिक वस्तुओं के प्रति आसक्ति क्यों रखी जाए? जब अंत में ईश्वर से मिलना है तो वह अपने साथ की धन दौलत के साथ नहीं मिलेगा| वह आपसे अहंकार रहित जीवन से ही मिलेगा, यही जीवन का लक्ष्य होना चाहिए| यह ही जीवन का सत्य हैं|

Moral:

मैं इस Story के बारे में कुछ नही कहता, आपने क्या सिखा comment में बताये|

मैं बस जीवन पर आधारित कुछ पंक्ति रखना चाहूँगा:-

Hindi Poem…

मिली थी जिंदगी
किसी के काम आने के लिये
पर वक़्त बीत रहा हैं...
कागज के टुकड़े कमाने के लिये|

क्या करोगे इतना पैसा कमा कर 
ना कफन में जेब हैं, ना कब्र में अलमारी
और ये मौत के फरिश्ते तो 
रिश्वत भी नही लेते|

पैसे से मकान ख़रीदा जा सकता हैं.......लेकिन घर नही|
पैसे से आरामदायक बिस्तर ख़रीदा जा सकता हैं.......लेकिन नींद नही|
पैसे से पुस्तक खरीदी जा सकती हैं.......लेकिन ज्ञान नही|
पैसे से दवाइयां खरीदी जा सकती हैं.......लेकिन सेहत नही|
पैसे से अच्छा पद खरीदा जा सकता हैं.......लेकिन सम्मान नही|
पैसे से घड़ी खरीदी जा सकती हैं.......लेकिन समय नही|
पैसे से खून खरीदा जा सकता हैं.......लेकिन जिंदगी नही|

LAST LINE
जिंदगी में बस 
इतना कमाओ की, जमीन पर जब बैठो 
तो लोग उसे आपका बड़प्पन कहे
औकात नही!

धन्यवाद!

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